समाजसेवा किससे लिये?

कलमसत्यकी✍️
आखिर समाज सेवा है क्या ?
समाज सेवा, इस समाज सेवा में जो सेवा शब्द है,यह सेवा किसके लिए ?
क्या समाज के लिए सेवा देने वाले  व्यक्ति,समूह या कोई संस्था अपने लिए या अपने लाभ के लिए यह कार्य करती है या सामाजिक बदलाव के लिए ?
या किसी शोषित व्यक्ति के उद्धार के लिए?
और अगर समाज सेवा दूसरों के लिए ही की जाती है तो फिर किसी दूसरे समाजसेवी के प्रति इंसान के मन में नफरत क्यों?
उस व्यक्ति से मनमुटाव क्यों?
क्या हम इस बात को भूल गए हैं कि एकता में शक्ति होती है ?
और अगर एकता में शक्ति होती है तो समाज के हित के विषय में सोचने वाले, कार्य करने वाले लोग, एक साथ एक दूसरे के पूरक बन करके बड़ा बदलाव लाने के लिए साथ क्यों नहीं आते ?
क्यों हम छोटे-छोटे स्वार्थ के लिए एक तंत्र को  भ्रष्ट बने रहने दें ?
आखिर क्या बाधा है?
वह कौन सी चीज है जो हमें एक दूसरे से मिलने से रोकती है?
एक दूसरे से कंधा से कंधा मिलाकर चलने से रोकती है ?
वह ऐसा कौन सा सोच है? वह ऐसी मन की कौन सी स्थिति है जो हमें समाज हित में कार्य करने वाले सभी लोगों को जोड़ने से रोकती है ?
हो सकता है हमारे विषय अलग हो, परंतु चाहत तो राष्ट्र सेवा ही होती है ना !
आखिर हमारा उद्देश्य जब एक है तो फिर हम एक क्यों नहीं.....
सत्येंद्र

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