तिरंगा बोल रहा है #कलमसत्यकी ✍️©️

#कलमसत्यकी ✍️ #काव्य #रचना 868
तिरंगा बोल रहा है 0.;
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हाँ तिरंगा बोल रहा है,
बीते दशकों के राज,
खोल रहा है।
हाँ तिरंगा बोल र\हा है,
सबके दिल की बातें,
टटोल रहा है।

आजादी की सच्ची बातें,
गोलमोल फैलाई गई वारदातें,
लिखा जो फर्जी इतिहासकारों ने,
सच अब ढोल पीट रहा है।
हाँ तिरंगा बोल रहा है।
दशकों के राज खोल रहा है

थे कौन शहीद भगत सिंह?
कौन थे आजाद चंद्रशेखर?
कैसे मिट गए बाबू सुभाष?
कालापानी काट रहे थे,
क्यों सावरकर?
अब वजन सबका,
वक्त तोल रहा है,
हाँ तिरंगा बोल रहा है।

कैसे मिली आजादी?
कैसे हुए हम स्वतंत्र?
कितने दर्द सहे, 
आज्ञात राष्ट्रभक्तों ने,
हाँ बहुत ज्यादा उसमें,
झोल रहा है।
हाँ तिरंगा बोल रहा है।

पैसों पर पलने वाले,
इतिहासकारों का नर्तन,
शुरू हो गया है खुल कर के,
जनमानस का मंथन,
सच सामने लाने को,
देश नई दिशा में,
डोल रहा है।
हाँ तिरंगा बोल रहा है ।

लोकतंत्र के पावन मंच पर,
मिटेगी परिवारवाद की शैली,
जो डूबे रहते निज विकास में,
भरते बस अपनी थैली।
जड़ से इन्हें उखाड़ फेंकने को,
जनता का मन,
हिचकोल रहा है।
हाँ तिरंगा बोल रहा है।
हाँ तिरंगा बोल रहा है।
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सत्येंद्र उर्मिला शर्मा 
मेरा देश मेरा दायित्व।
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